अितिर� न्याियक मिजस्�ेट , बारां ने अपने आदेश म� यह स्प� उल्लेख िकया है िक िदनांक 5.5.98 को दोन� प्ष� म� जो राजीनामा हुआ था और उसके अनुसार �त्यथ� शकीला ने 29 हजार रूपये �ा� कर इस िदन तक बकाया 8600/ - रूपये की रािश को माफ कर िदया था। इसके उपरान्त िदनांक 5.11.98 को �त्यथ� की ओर से दूसरा आवेदन यह अंिकत करते हुए �स्तुत िकया गया िक �ाथ� ने इसे िदनांक 7.5.98 से छोड़ िदया है, इस कारण यह उससे उ� तारीख से िदनांक 7.11.98 तक छ: माह की अविध का 600/ - रूपये मािसक के अनुसार 3600/ - रूपये गुजारे भ�े हेतु �ा� करने की अिधकािरणी है। इसके उ�र म� �ाथ� ने अंिकत िकया है िक शकीला इसके यहां से इसकी अनुपिस्थित म� स्वयं चली गयी और जब यह लेने गया था तो इसके साथ आने से इन्कार कर िदया। उसे उ� रािश �ाि� हेतु धारा 125 दण्ड �ि�या संिहता के अन्तगर्त कायर्वाही करनी चािहए। िवचारण न्यायालय ने उल्लेख िकया िक पूवर् म� हुए राजीनामे म� यह तथ्य कह� भी अंिकत नह� है िक शकीला ने अपने भरण पोषण के अिधकार का स्वेच्छा से �ाथ� इस्हाक मोहम्मद के प्ष म� त्याग कर िदया है। अत: इस्हाक मोहम्मद का यह तकर् िक शकीला भरण पोषण की रािश �ा� करने की अिधकािरणी नह� है, सारहीन है और इस �कार िदनांक 7.5.98 से िदनांक 7.11.98 तक छ: माह की रािश 3600/ - रूपये गुजारे भ�े के रूप म� िदलाने का आदेश पािरत िकया। इस आदेश िदनांक 18.4..2000 के िवरू� �स्तुत िनगरानी म� अपर सैशन न्यायाधीश, बारां ने समस्त तथ्य� का िवस्तार से िववेचन करते हुए यह उल्लेख िकया िक उ� िदलायी गयी रािश राजीनाम� के प�ात की अविध से सम्बिन्धत है और पूणर् रूप से न्यायालय �ारा पािरत आदेश िदनांक 06.02.1996 के अनुसार एवं दण्ड �ि�या संिहता के �ावधान� के अनुरूप है। राजीनामा पूवर् की देय रािश हेतु ही हुआ है जो राजीनाम� के सम्बन्ध म� पािरत आदेश के अवलोकन से ही स्प� है। इस �कार अधीनस्थ न्यायालय के आदेश म� कोई अवैधता नह� पाते हुए िनगरानी को सारहीन होने के कारण िनरस्त िकया।