साथ मेरा भतीजा अशोक व मेरा छोटा भा�जा सैले�्श भी साथ था। हम लोग टे�पू से गये थे व मेरा मानिसंह व महेश, धूजी, मुनेश ये मोटर साइिकल से थे। बांदीकुई म� हमने मेज खरीदी हम वहां से शाम 7 बजे अपने घर चले तो मेरा भांजा मानिसंह व महेश, धूजी, मुनेश हम� बालाजी मोड़ पर एक होटल पर िमले। हमने और उ�होने वहां पर खाना खाने बैठे, तो मेरा भांजा मानिसंह ने मेरे से कहा िक मामा महेश , धूजी, मुनेश मेरे से शराब के िलये �पये मांग रहे ह�। मेरे जेब की बीस हजार �पये है और मुझे जबरद�ती अपने साथ लेकर आये ह� तोहमने कहा िक तू हमारे साथ चल तो महेश ने मेरे से कहा िक तुम चलोहम थोड़ी देर बाद म� आ रहे ह�। हम वहां से रवाना हो गये और मानिसंह, महेश, धूजी, मुनेश को खाना खाते हुये आ गये। कुछ समय बाद मानिसंह के टेलीफोन से हम� ये सूचना दी िक मानिसंह की लाश महुआ अ�पताल म� पड़ी है। तब हम हलैनासे वािपस आये तो मेरे भांजे की लाश हमने महुआ अ�पताल म� देखी। उसके शटर् के बटन टूटे हुए थे। जेब फटी थी व िसर पर दो चोट थी और गले पर िनशान थे। हमने महेश, धूजी, मुनेशको देखा व तलाश िकया वहां हम� नहीं िमले। उसके न�बर� पर फोन िकया तो मोबाइल ि�वच ऑफ थे। गांव म� भी तलाश िकया तो य� ने शराब वहां भी नहीं है। मेरे भांजे को उक्� �यि्व के िलये पैसे मांगने पर नहीं देने के कारण ह�या कर दी है। अत: उ्व �यि्व य�के िखलाफ कानूनी कायर्वाही की जावे।''