न्यायालय द्वारा पािरत आदेश पूणर्तः अवैध, मनमाना और इस माननीय न्यायालय द्वारा िनरस्त िकए जाने योग्य है। प्राथीर् एक वृद्ध व्यिक्त है और उसकी जन्म ितिथ 01.01.1948 है, िजसके अनुसार उसकी आयु लगभग 77 वषर् है। प्राथीर् और िवपक्षी संख्या-2 के बच्चों ने प्राथीर् को घर से िनकाल िदया है, वे इस उम्र में प्राथीर् की िकसी भी प्रकार से देखभाल नहीं कर रहे हैं। 03 वयस्क पुत्र और 02 वयस्क पुित्रयां होने के बावजूद उसे अपनी आजीिवका के िलए काम करने हेतु मजबूर होना पड़ रहा है। वह एक दुकान में काम कर रहा है जहाँ उसे 5,000/- रुपये िमलते हैं और िकसी तरह वह अपना जीवन यापन कर रहा है।प्राथीर् कई बीमािरयों से ग्रिसत है, लेिकन प्राथीर् के बच्चों को उसकी कोई िचता नहीं है। यहाँ यह उल्लेख करना प्रासंिगक है िक प्राथीर् के तीनों पुत्र िवपक्षी संख्या-2 के साथ रह रहे हैं और उसकी उिचत देखभाल कर रहे हैं, परंतु केवल प्राथीर् को प्रतािड़त करने के उद्देश्य से दंड प्रिक्रया संिहता की धारा 125 के अंतगर्त यह झूठा और तुच्छ आवेदन दायर िकया गया है।प्राथीर् ने अपनी सबसे छोटी पुत्री आकांक्षा (िवपक्षी संख्या-3) का िववाह िदनांक 22.05.2025 को संपन्न कराया। िववाह में सारा खचर् प्राथीर् द्वारा वहन िकया गया और उसने कुछ आभूषण भी खरीदे जो िववाह के समय अपनी पुत्री को उपहार स्वरूप िदए गए। प्राथीर् को एकपक्षीय आदेश िदनांक 01.03.2024 की जानकारी नहीं थी और िवपक्षी संख्या-2 व 3 ने िदनांक 02.07.2020 से मई 2024 तक की कुल 45 महीनों की भरण-पोषण रािश (िवपक्षी संख्या-2 के 1,35,000/- रुपये और िवपक्षी संख्या-3 के 1,35,000/- रुपये, कुल 2,70,000/- रुपये) की वसूली हेतु िदनांक 25.06.2024 को प्रधान न्यायाधीश, पिरवार न्यायालय, वाराणसी के समक्ष दंड प्रिक्रया संिहता की धारा 128 के अंतगर्त आवेदन प्रस्तुत िकया। उक्त आवेदन को वाद संख्या 685/2024 के रूप में पंजीकृत िकया गया। धारा 128 दंड प्रिक्रया संिहता के अंतगर्त उक्त वाद संख्या 685/2024 को संबंिधत न्यायालय द्वारा स्वीकार कर िलया गया और आदेश िदनांक 24.03.2025 के माध्यम से वसूली वारंट जारी कर िदया गया। वसूली वारंट जारी होने के पश्चात, प्राथीर् ने अपने िरश्तेदारों से कुछ पैसे उधार िलए और संबंिधत न्यायालय के समक्ष 50,000/- रुपये जमा िकए, िजसका उल्लेख आदेश पत्र िदनांक 29.08.2025 में िकया गया है। 'रजनीश बनाम नेहा' (Rajnesh vs Neha) मामले के अनुसार, पीिड़ता केवल 11 महीने का िनष्पादन वाद (execution case) दायर कर सकती है, परंतु इस मामले में िवपक्षी संख्या-2 ने 45 महीने का िनष्पादन वाद दायर िकया और िवद्वान न्यायालय ने िबना न्याियक िववेक का प्रयोग िकए उक्त वाद को स्वीकार कर िलया और प्राथीर् के िवरुद्ध वसूली वारंट जारी कर िदया। अतः आक्षेिपत आदेश िदनांक 24.03.2025 पूणर्तः अवैध, मनमाना और िनरस्त िकए जाने योग्य है। आगे यह भी कहा गया िक प्राथीर् की पैतृक संपित्त प्राथीर् के पुत्रों के पक्ष में नामांतिरत कर दी गई और उन्होंने प्राथीर् को मृत घोिषत मानकर पूरी संपित्त बेच दी है। खतौनी में िवक्रेता के नाम के साथ िपता का नाम ' स्वगीर्य राम जी पाण्डेय' स्पष्ट रूप से अंिकत है, जो प्राथीर् के पुत्रों के आचरण को स्पष्ट रूप से दशार्ता है। मामले के तथ्यों और पिरिस्थितयों को देखते हुए न्याय के िहत में यह उिचत है िक यह माननीय न्यायालय प्रधान न्यायाधीश, पिरवार न्यायालय, वाराणसी द्वारा पािरत आदेश िदनांक 24.03.2025 त्रुिटपूणर् है एवं अपास्त िकए जाने योग्य है।