करण के त�य सं्षेप म� इस ्ऺकार ह� िक राजे�्श कुमार जैन पु्ऴ जुगमंिदरदास ने िदनांक 7.4.85 को ्ऺदशर् पी.3 िलिखत िरपोटर् थाना कोतवाली अलवर पर इस आशय की पेश की िक आज सायं लगभग चार बजे वह, उसके िपता जुगमंिदरदास, उसका भाई वीरभूषण उनकी फैक ् ी मालन की गली म� थे िक अचानक छगनलाल, ल�मीकांत, ल�मीकांत की प�ी, दयाकांत, �ीकांत, उमाकांत, राजेश, नरेश, ्ऺभुदयाल, अशोक तथा रामावतार, िज�होन� एक नाजायज िगरोह बना रखा है व फैक ् ी को जबरद�ती खाली कराना चाहते ह�, यह सभी एक राय होकर जान से मारने की नीयत से हाथ� म� धारदार हिथयार, चाकू, छुरे, लोहे के सिरये, लोहे का पैना पाईप तथा लािठयां िलये हुए जबरद�ती मना करने पर भी फैक ् ी के अंदर घुस आये और आते ही ल�मीकांत की प�ी ने उसके िपता के माथे पर लाठी की मारी, ल�मीकांत ने सीने व पेट म� छुरे से चोट पहुंचाई। ्ऺभुदयाल ने चाकू की कमर म� मारी। छगनलाल ने दांये ख�वे पर चाकू की मारी। अशोक व रामावतार ने भी चाकू व छुरे से चोट पहुंचाई। उसके भाई वीरभूषण की नाक पर राजेश ने राजेश ने लोहे की बा�टी की मारी। �ीकांत ने लोहे का पैना पाईप जैसा हिथयार उसकी पीठ म� मारा। उमाकांत, दयाकांत आिद ने भी वीरभूषण के शरीर पर चोट� पहुंचाई। इन चोट� की वजह से उसके िपता व भाई के काफी खून िनकलने से सारे कपडे खून से भीग गये। उनकी हालत खराब हो रही थी, इसिलये उ�ह� तुर�त अ�पताल ले गये जहां पर उनकी गंभीर हालत देखकर भतर् कर िलया। नरेश ने उसके प�थर की मारी जो उसकी आंख के नीचे लगी। वह डरकर बाहर भागा। उसने मदनलाल के यहां से पुिलस को टेलीफोन िकया। वािपस फैक ् ी पहुंचा तो वहां से सभी लोग भाग गये।