ाथर्/अिभयु्व ने यह दाि�डक पुनरी्षण यािचका द�ड ्ऺि्वया संिहता की धारा 397 सपिठत धारा 401 के अधीन �यायालय िविश� �यायाधीश अनुसूिचत जाित-जनजाित अ�याचार िनवारण ्ऺ करण, बू�दी ्षारा दाि�डक अपील संख्या 2/2016 म� िदनांक 11.01.2016 को पािरत आदेश के िव�्ष्ऺ �तुत की है, िजस आदेश के मा�यम से िव्षान अपीलीय �यायालय ने्ऺ ाथ� ्षारा ्ऺ�तुत अपील अ�तगर्त धारा 374 द�ड ्ऺि्वया संिहता िमयाद बाहर होने से गुण व दोष पर िवचार िकये िबना ही अ�वीकार कर खािरज की है।्ऺ ाथर् ने उ्व अपील �यायालय अितिर्व �याियक मिज�्िेट, ्ऺथम वगर्, ्वम संख्या 3, बू�दी ्षारा दाि�डक ्ऺकरण संख्या 337/2006 म� िदनांक 15.03.2007 को पािरत िनणर्य व द�डादेश के िव�्ष ्ऺ�तुत की थी, िजसके को भारतीय द�ड संिहता मा�यम से िवचारण �यायालय ने ्ऺाथर् अिभयु्व की धारा 411 के अधीन द�डनीय अपराध का दोषी करार करते हुए एक वषर् के साधारण कारावास तथा �पये 1000/- के अथर्द�ड से तथा अथर्द�ड संदाय नहीं होने पर 15 िदन के अितिर्व साधारण कारावास से दि�डत िकया था।्ऺ ा ने िनवेदन िकया िक इस त�य को �ि�गत ाथर् के िव्षान अिधव्व रखते हुए िक ्ऺाथर् िदनांक 04.01.2016 से िनर�तर अिभर्षा म� है तथा वह सात माह से भी अिधक अविध का कारावास पहले ही भुगत चुका है, ्ऺाथर् िवचारण �यायालय ्षारा पािरत िनणर्य को गुण व दोष के आधार पर अब