" जजिसमम पप्राजररननी कके पपितप्रा कप्रा नप्राम बततौर ससंक्रमणनीय भभूपमधर दजिर हहै। पप्राजररननी दप् र ाप्रा अपिननी पपतपिरनीकप्रा मम यह स्वनीकप् र ा पकयप्रा गयप्रा हहै पक उसकके पपितप्रा कके सप् र ा जिनपिद रप्रायबरकेलनी मम ककपष ययोग्य भभूपम हहै तरप्रा उसकयो पपितप्रा कप्रा मकप्रान लखनऊ मम भनी हहै, जजिसमम वह अपिनके पपितप्रा कके सप् र पनवप्रास करतनी हहै तरप्रा उसककी मप्रातप्रा गप्रासंव वप्रालके मकप्रान मम रहतनी हहै पिरन्ततु पप्राजररननी लके पपितप्रा कके पिप्रास पिमशन व ककपष ययोग्य भकेपम हयोनके सके पवपिकनी अपिनके कतरव्ययों / दप्रापयत्वयों सके पवमतुख नहहीं हयो सकतप्रा हहै और न हनी उसकके कतरव्य व दप्रापयत्व इस आधप् र ा पिर पप्राजररननी कयो पप्राप्त हयोनके वप्रालके पकसनी कप्रानभूननी अजधकप् र ा सके वसंपचित कर सकतके हह। पवपिकनी दप् र ाप्रा पितप्रावलनी पिर पप्राजररननी कके दयो फयोटयोगप्राफ्स सनी 11/2 व सनी 11/3 पस्त त ु पकयके गयके हह तरप्रा पपतपिरनीकप्रा मम पप्राजररननी दप् र ाप्रा इन फयोटयोगप्राफ्स कके ससंबसंध मम यह बतप्रायप्रा गयप्रा हहै पक उसकके दप् र ाप्रा पशपककप्रा ककी टटकेपनसंग लनी गयनी हहै, जजिस समय उसनके यह टटकेपनसंग लनी रनी। यके दयोनयों फयोटयोगप्राफर उसनी समय कके हहै। इसकके अपतररक्त पवपिकनी दप् र ाप्रा पप्राजररननी कके एम.ए. पिप्रास हयोनके कप्रा भनी पपित पितप्रावलनी पिर ससंलग्न पकयप्रा गयप्रा हहै। अपिनके नकेहप्रा बनप्राम रजिनकेश कके शपिरपित मम पवपिकनी दप् र ाप्रा स्वयसं कयो ककप्रा 5 पिप्रास हयोनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा हहै तरप्रा स्वयसं कयो बकेरयोजिगप् र ा तरप्रा कयोई भनी ससंपिन्न न हयोनके कप्रा करन पकयप्रा गयप्रा हहै पिरन्ततु जियो पपित पप्राजररननी दप् र ाप्रा पितप्रावलनी पिर दप्राजखल पकयके गयके हह। पितप्रावलनी कके पिररशनीलन सके यह पतनीत हयोतप्रा हहै पक अद्यतन खततौननी मम भनी पवपिकनी रप्राजिकतुमप् र ा कके पपितप्रा कप्रा नप्राम बततौर ससंक्रमणनीय भभूपमधर पवपिकनी ककी गप्राम भभूपम पिर दजिर हहै तरप्रा पवपिकनी कयो गप्राम तलहतौरनी, जजिलप्रा उन्नप्राव मम भनी ककपष ययोग्य पियप्ाप्त भभूपम पप्राप्त र हहई हहै, जजिसमम उसकप्रा नप्राम रप्राजिकतुमप् र ा कके स्रप्रान पिर रप्रामकतुमप् र ा दजिर हहै। पिरन्ततु पपितप्रा कप्रा नप्राम व पनवप्रास स्रप्रान वहनी असंपक, हहै, जियो पप्राजररननी दप् र ाप्रा पप् र ारनप्रापित असंतगरत धप् र ाप्रा 125 दसं.प.ससं मम असंपकत पकयप्रा गयप्रा हहै। जिहैसप्रा पक उपिरयोक्त उपल्लिजखत हहै पक पवपिकनी दप् र ाप्रा स्वयसं कयो चिल एवसं अचिल ससंपिजत्ति सके पिकरक करनके कप्रा जियो अपभकरन पकयप्रा गयप्रा हहै उसकके ससंबसंध मम कयोई भनी दस्तप्रावकेजि उसकके दप् र ाप्रा पस्त त ु नहहीं पकयप्रा गयप्रा हहै न हनी पवपिकनी दप् र ाप्रा स्वयसं कके बनी .पिनी.एल.कप् र ार ककी