उपरमोक सद्वाक्ष्य कके दृवष्टिरत धिद्वारद्वा-244 द०प्र०ससिं० मम पररविद् व ादनरी कके वपतद्वा रमोवविन्द रद्वाम कद्वा बयद्वान भरी झदठद्वा सद् व ाबत हमो जिद्वातद्वा हवै, क्यरोंवक वदनद्वासिंक-20.05.2014 कमो पररवविद् व ादनरी रद्वाजिरीखपुशरी हमोकर वविदद्वा हमोकर ससपुरद्वाल जिद्वानके ककी बद्वात कहतरी हवै और परी०डब्लद०-2 रमोवविन्दरद्वाम उक वतधथ कमो अपनरी पत्नरी , सद्वालके आवद कमो ल क ेर अपनरी पपुररी ककी ससपुरद्वाल जिद्वानके और समझद्वानके बपुझद्वानके कद्वा प्रयद्वास वकए जिद्वानके ककी बद्वात कहद्वा हवै। उपरमोक सके मद्वामलके मम पररविद् व ादनरी दद्वारद्वा प्रस्तपुत वकए रए कथद्वानक कद्वा आधिद्वार हरी समद्वाप्त हमो जिद्वातद्वा हवै। धजिरह मम इस सद्वाक्षरी नके कहद्वा हवै वक मपुकदमद्वा उसककी लड़िककी नके वकयद्वा हवै , विह सद्वाथ मम आयद्वा थद्वा, विककील सद्वाहब नके जिमो धलखद्वायद्वा थद्वा, विह मपुकदमम मम धलखद्वा हवै वफिर कहद्वा उसककी लड़िककी नके जिमो कहद्वा थद्वा विह धलखद्वा हवै। अवभयपुक ससिं0-1 ससिंजिरीवि वविदद्वा करद्वानके कमो तवैयद्वार नहह हह, यवद लकेनके आयमरके तमो विह अपनरी लड़िककी कमो भकेजिनके कमो तवैयद्वार हवै। उसकद्वा यह कथन वनष्कषर दकेतद्वा हवै वक यवद अपरीलद्वाथर्त् र ीण ककी ओर सके कमोई मद्वासिंर ककी जिद्वा रहरी हमोतरी और उस मद्वासिंर कके ससिंबसिंधि मम इस सद्वाक्षरी ककी पपुररी कमो शद्वाररीररक वि मद्वानधसक यद्वातनद्वाएहाँ दरी जिद्वा रहरी हमोतरी तमो यह व्यवक अपनरी लड़िककी कमो इस तरह आसद्वानरी सके वविदद्वा करनके कके धलए तवैयद्वार नहह हमोतद्वा , जिमो यह प्रकट कर रहद्वा हवै वक इस सद्वाक्षरी ककी पपुररी अपनके मद्वायकके मम अवतररक दहकेजि ककी मद्वासिंर कके धलए शद्वाररीररक वि मद्वानधसक प्रतद्वाड़िनद्वा कके कद्वारण नहह रह रहरी , बणलक वकसरी और कद्वारण सके अपनके मद्वायकके मम रह रहरी हवै, धजिसकके कद्वारण सके अपरीलद्वाथर्त् र ीण कद्वा पपुर उसके वविदद्वा करद्वानके कमो तवैयद्वार नहह हवै लकेवकन पररविद् व ादनरी ककी ओर सके उक कद्वारण कमो सपष्टि नहह वकयद्वा रयद्वा और जिमो कद्वारण दवशरत वकयद्वा रयद्वा विह ससिंवदग्धि हमो जिद्वातद्वा हवै।"