उक्त साक्षी ने प्रकरण में दजJ हुई प्राथकिमकी प्रदशJ क-2 तथा उसी परिरप्रेक्ष्य में कायमी मुकदमा जी०डी० प्रदशJ क-3 को साकिबत किकया है। किनक्षि{त रूप से उक्त साक्षी के साक्ष्य से अभि)योजन पक्ष के उपरोक्त वर् ण ित प्रलेख किवधानानुसार साकिबत हैं, लेकिकन इस सन्द)J में मैं यह कहना समीचीन पाता हूँ किक प्रकरण का वादी मुकदमा अभि)योजन साक्षी संख्या-1 शहाबुद्दीन है, उसी ने तहरीर प्रदशJ क-1 पुलिलस अधीक्षक, अम्बेडकर नगर को किदया था, जिजसके आधार पर उक्त अभि)योजन साक्षी संख्या-3 ने चिक एफ०आई०आर० प्रदर्शचक एफ०आई०आर० प्रदश क-2 व कायमी मुकदमा जी०डी० प्रदशJ क-3 तैयार किकया था। उक्त अभि)योजन साक्षी संख्या-1 वादी मुकदमा शहाबुद्दीन ने अपने समग्र साक्ष्य में यह स्पष्ट किकया है किक प्राथकिमकी उसने अपने )ाई सलाहु द्दीन के बताने के आधार पर लिलखाया था और उस सन्द)J में अपने )ाई के बताने के आधार पर ही प्राथJना-पत्र किदया है, जैसा उसने बताया था, वैसा उसने किदया। उक्त अभि)योजन साक्षी संख्या-1 शहाबुद्दीन ने अपने प्रक्षितपृच्छा के साक्ष्य में यहाँ तक कहा किक तहरीर में उसके )ाई सलाहुद्दीन ने क्या लिलखवाया था, उसे याद नहीं है, उसके बारे में उसका )ाई ही बता सकता है, अथाJत उक्त अभि)योजन साक्षी संख्या-1 शहाबुद्दीन को तहरीर प्रदशJ क-1 में वर् ण ित प्रकिवकिष्टयों के सम्बन्ध में कोई जानकारी ही नहीं है। इससे यह )ी ध्वकिनत हो रहा है किक अभि)योजन साक्षी संख्या-1 शहाबुद्दीन द्वारा प्राथकिमकी लिलखाने हेतु तहरीर किदया ही नहीं गया, क्योंकिक यकिद तहरीर में वर् ण ित प्रकिवकिष्टयां उसके द्वारा लिलखायी गयी होतीं, तो उसके सम्बन्ध में उक्त साक्षी को जानकारी होती। लेकिकन इसके बावत उक्त साक्षी ने कोई )ी सारवान कथन अपने साक्ष्य में नहीं किकया है, बल्किल्क यह स्पष्ट है किक तहरीर में उसके )ाई सलाहुद्दीन ने क्या लिलखाया था, इसके सम्बन्ध में कोई जानकारी उसे नहीं है, इसके सम्बन्ध में कोई )ी बात उसका )ाई ही बता सकता है। अभि)योजन साक्षी संख्या- 2 सलाहुद्दीन पत्रावली पर परीक्षिक्षत है, जो उक्त अभि)योजन साक्षी संख्या-1 शहाबुद्दीन का )ाई है। अभि)योजन साक्षी संख्या-2 ने प्रकरण में कारिरत हुए घटनाकम को पूरी तरह से इन्कार किकया है और घटना के बारे में किकसी प्रकार की जानकारी नहीं होने की बात कही है, उक्त साक्षी पक्षद्रोही हो गया है। ऐसी दशा में उपरोक्त तथ्य के साल् क िक्षयों के साक्ष्य से प्राथकिमकी में वर् ण ित प्रकिवकिष्टयों की सत्यता पूरी तरह से संकिदग्ध हो जा रही है। इन सब परिरल्किस्थक्षितयों में उक्त अभि)योजन साक्षी संख्या-3 के साक्ष्य के माध्यम से साकिबत हुए उपरोक्त वर् ण ित प्रलेखीय साक्ष्यों की )ी सत्यता पूरी तरह से संकिदग्ध हो जा रही है। अतः उक्त साक्षी के साक्ष्य से )ी अभि)योजन पक्ष के कथानक को, जो किक उपरोक्त वर् ण ित अभि)योग के सम्बन्ध में है, कोई बल नहीं किमल रहा है।