“इस र९कार जो पर७ावली पर सा�य आयी है, उसके अनुसार मुस्तगीस ने अिभयु्व को पहचाना नह�, गलत �ि्व की पहचान की, पिरवादी ने अिभयु्व को 49,000/- देने की कह� र९िवि� नह� की, न ही आयकर िरटनर् म� िदखाया तथा पिरवादी ने यह कहा है िक साधारणत: मरीज� को रुपये उधार नह� देता, मार७ अिभयु्व की िजरह म� यह कह देने से यह कहना गलत है िक गेन्दालाल व उसके लड़के गोपाल �ारा जो चेक साईन करा कर िलये गये थे, उसम� से एक चेक यही है, इससे यह नह� माना जा सकता िक पिरवादी ने अिभयु्व को कोई रुपये उधार िदये ह� तथा उसके बदले चेक िदया हो, पिरवादी �ारा जो नोिटस िदया गया, उसका उसने जवाब िदया उसम� भी उ्व एफ.आई.आर. दजर् कराने का अंिकत िकया है, गेन्दालाल के िवरु� एफ.आई.आर. भी दजर् हुई है तथा आरोप पर७ भी पेश हुआ है। यह तमाम तथ्य इस बात की ओर इंिगत करते ह� िक पिरवादी ने अिभयु्व को कोई ऋण नह� िदया। इस िस्थित म� इस न्यायालय की िवनर९ राय म� अपीलाथ� को दोषिस� करार िदया जाना तथ्य� एवं कानून के िवपरीत है। अत: अपीलाथ� को दोषमु्व करार िदया जाना न्यायोिचत है।"