आदेश विदनांक 14.02.2011 विनरस्त विकये जाकर विनगरानी स्�ीकार की जाये। , मनै स्थल विनरीक्षण विकयाे जिजसस वि�विदत हुआ विक विनगरानीकताे जिजस स्थान पर. यानी गाटा स० ं 249,350 मं अे म्बड़कर पाके . � हरिरजन आबादी सुरधिक्षत कराना चाहता ह, ै , मरे े �ह गाटा मुख्य माग स. काफी आबादी के चारों ओर से धिघरे हुए हे ै वि�चार स इस स्थान पर आबादी � अे म्बड़कर पाके . हतु भूविम सुरधिक्षत विकयाे जाना उधिचत नहीं ह �तै मान म. ं अे म्बड़कर पाके . � हरिरजन आबादी हतु भूविमे , मुख्य माग स. लगी हुई सुरधिक्षत � गई हे ै तथा उसमं डा० भीमरा� अे म्बड़कर कीे , मूर् त ि भी स्थाविपत है यविद इस स्थान स उक्त मत हे तु सुरधिक्षत भूविम मे ं बदला�े , विकया जाता है तो �ह वि�धि� अनुकूल नहीं होगा। जोत चकबन्दी अधि�विनयम की �ारा-9ख(1) 9 मं े व्य�स्था दी गई ह विक जब �ारा ै क अ�ीन जिसद्धाे न्तो के , वि��रण क वि�रूद्ध आपलित्त प्रस्तुत की गई होे तो सहायक चकबन्दी अधि�कारी सम्बद्ध पक्षों को सुन�ाई का अ�सर दने और चकबे न्दी सविमधित क दृविष्टकोण परे , जो वि�चार करन के पश्चात अपनी रिरपोटे चकब. न्दी अधि�कारी को प्रस्तुत करगाे 9ख(2) आपलित्तयों का विनस्तारण विनयत रीधित स करे गा। �ारा े मं े व्य�स्था ह विकै " -9 , कोई यविद जिसद्धान्तो क वि��रण के वि�रूद्ध �ाराे मं विनयत समय के भीतरे आपलित्त प्रस्तुत न की गई हो तो उसकी शुद्धता की परीक्षा करन की दृविष्ट से े चकबन्दी अधि�कारी चकबन्दी सविमधित को उधिचत सूचना दने के पश्चात कटक काे स्थानीय विनरीक्षण करगा और तत्पश्चात �ह जिसद्धाे न्तों क वि��रण मे ं एसे परिरे ष्कार , या परिर�तन कर सकता ह. ै जो �ह आ�श्यक समझ।े इससे स्पष्ट है विक जिसद्धान्तो के वि��रण पर की गई आपलित्तयों का विनस्तारण �ारा -21(1) के अन्तग.त विकया गया है, जब इस �ारा के अन्तग.त आपलित्त ही पोषणीय नहीं थी अतः ऐसी स्थिस्थधित में चकबन्दी अधि�कारी द्वारा आदेश विदनांक 10.04.2000 को विनरस्त कर उधिचत काय.�ाही की है जहाँ तक विनगरानी कता. का यह कथन विक परगनाधि�कारी द्वारा वि��ाविदत भूविम को अपने आदेश विदनांक 15.171994 अन्तग.त अकृविषक घोविषत विकया गया था, इस संबं� में वि�पक्षीगण की ओर से जोत चकबन्दी आकार पत्र 29 काय.�ाही पुस्तक, जिजसमें विदनांक 18.08.1992 की काय.�ाही अंविकत है, जिजसके अनुसार ग्राम में �ारा 4 क(2) का प्रकाशन विदनांक 4क (2) 18.08.1992 को विकया गया, इसस जिसद्ध हे विक �ारा ै क जारी वि�ज्ञविप्त के े पश्चात राजस्� न्यायालय को गुण दोष क आ�ार पर आदे श पारिरत करने कीे 5(2) के अधि�कारिरता नही रह जाती ह। ऐसै मामले मे ं उक्त अधि�विनयम की �ारा े , अन्तगत उपशविमत हो जात. हे ै अतः परगनाधि�कारी द्वारा पारिरत आदश विदनाे कं 15.01.1994 �ारा 4 क(2) , की वि�ज्ञविप्त जारी होन के पश्चात पारिरत विकया गया हे ै जो वि�धि� की दृविष्टकोण मं शूे न्य ह। अतै ः उपरोक्त कारणों स इस विनगरानी के े माध्यम स विनगरानीकताे गण को कोई अनुतोष विदया जाना स. म्भ� नहीं ह औरै अम्बड़कर पाके . � हरिरजन आबादी �तमान म. ं उधिचत स्थान पर होने तथा डा०े भीमरा� अम्बड़कर की मूर्े त ि स्थाविपत होन के कारण इसमे ं परिर�ते न विकया जाना. , ।” सम्भ� नहीं है तद्नुसार विनगरानी विनरस्त विकय जाने योे ग्य है