"ललेककिन ससाथ हही यहहीं पर स्पष्ट रुप सले कदिखसायही पड़तसा हहै ककि अकभिययक्तगण दसारसा आगलेयसास्त्र किसा लले जसानसा ससाकहीगण नले अपनले बयसान मम ततो किहसा हहै ललेककिन घटनसा क्रम मम ककिसही भिही आगलेयसास्त्र किसा प्रयतोग हतोनसा ककिसही भिही ससाकही किले बयसान मम नहहीं आयसा हहै और न हही आगलेयसास्त्र सले वसादिही पक किसा कितोई व्यकक्त हही घसायल हहआ हहै अथसार्थात आगलेयसास्त्र किकी कितोई चतोट नहहीं हहै। ऐसले मम मम इस मत किसा ह ह ककि धसारसा 395/397 भिसा0 दि 0 सस0 किसा अपरसाध अकभिययक्तगण किले खखलसाफ ततो ससाकबत नहहीं हतोतसा हहै, ललेककिन किच्चही दिहीवसार सले लतोहले किसा फसाटकि अकभिययक्तगण दसारसा लले जसानसा सभिही ससाकहीगण किले सशपथ बयसान मम ससामसान रुप सले आयसा हहै। ससाथ हही अपनले धसारसा 313 दि 0 प्र 0 सस0 किले बयसान मम अकभिययक्त वलेदिप्रकिसाश नले अकभियतोजन ससाकहीगण दसारसा झझूठही गवसाहही दिलेनले किकी बसाबत बतसायसा हहै और किहसा हहै ककि अकभियतोजन ससाकहीगण वसादिही किले ररश्तलेदिसार हम। वसादिही दसारसा झझूठसा फसससायले जसानले किसा किथन किरतले हहए सफसाई मम तमसाम दिस्तसावलेजही ससाक्ष्य दिसाखखल ककियले गयले हहै, खजनकिसा मलेरले दसारसा सम्यकि अवलतोकिन ककियसा गयसा। ललेककिन बचसाव पक दसारसा दिसाखखल ककिसही भिही दिस्तसावलेज सले अकभिययक्त कितो लसाभि हसाखसल नहहीं हतोतसा हहै। ससाथ हही पतसावलही किले सभिही औपचसाररकि प्रपत यथसा नक्शसा नजरही, आरतोप पत आकदि किकी औपचसाररकि सत्यतसा कितो अकभियतोजन पक दसारसा औपचसाररकि ससाकही पही0 डब्लझू0 4 कवश्वनसाथ खससह दसारसा अपनले सशपथ बयसान सले बखझूबही ससाकबत ककियसा गयसा हहै।